बरेली। मुहर्रम शरीफ़ की चांद की 9 तारीख़ को खानकाहे आलिया नियाजिया में सुबह से ही जगह जगह लंगर तकसीम किया गया और सबीलें लगाई गईं और इमाम बाड़े में लोग हाजरी के लिए कतारों में लगे रहे और अदब एहतराम से अपनी बारी का इंतजार करते रहे और आंखों में आंसू दिलों में गम लबों पर या हुसैन के नारों की सदायें बुलंद रहीं। शाम को मगरिब की नमाज़ के बाद इमाम बारगाह में अलम शरीफ पेश करने का सिलसिला शुरू हुआ। जिसमें मन्नत मानने वालों के अलम ज़ादा पेश हुए।
इशा की नमाज़ के बाद साहिबे सज्जादा नशीन सरकार मेंहदी मियां नियाज़ी सहाब किब्ला के साथ सभी सहाबजादगान और तमाम मुरीद और अकीदतमंदों के साथ इमाम बाड़े शरीफ पर हाजरी के लिए तशरीफ ले गए। रात भर इमाम बाड़े शरीफ में जगह जगह मर्सिया ख्वानी और ज़िक्र इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के महफिलें मुनक्कित की गई।
चांद की 10 तारीख़ अशरे के दिन सुबह 9 बजे खानकाह के जुलूस को प्रबंधक जुनैदी मियां नियाज़ी सहाब साहिबे सज्जादा नशीन सरकार अल्हाज मेंहदी मियां नियाज़ी सहाब किब्ला ने जुलूस को रुखसत किया और ये जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ बाकरगंज करबला शरीफ पहुंचा और जगह जगह सभी धर्मों के लोगों ने खानकाह के जुलूस का स्वागत किया।
करबला शरीफ जैसे ही जुलूस पहुंचा वहां पर साहिबे सज्जादा नशीन सरकार अल्हाज मेंहदी मियां नियाज़ी सहाब किब्ला ने लंगर तक्सीम किया और फिर सभी लोग इमाम बारगाह में हाजरी के लिए गए और वहां से सभी लोग खानकाह की सबील पर पहुंचे । असर की नमाज़ के बाद सभी लोग साहिबे सज्जादा नशीन सरकार मेहंदी मियां नियाज़ी सहाब किब्ला के साथ इमाम बाड़े शरीफ में हाजरी के लिए तशरीफ ले गए और वहा से वापस खानकाह तशरीफ ले आए।










