बरेली। गर्मी ने इस बार अप्रैल में ही अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। इंसानों के साथ-साथ बेजुबान पक्षियों का भी बुरा हाल है। इसी को देखते हुए फतेहगंज पूर्वी क्षेत्र की सामाजिक संस्था ‘गूंज’ ने एक सराहनीय कदम उठाया है। संस्था ने पक्षियों को गर्मी और लू से बचाने के लिए एक माह का ‘दाना-पानी अभियान’ शुरू करने की घोषणा की है। ‘गूंज संस्था’ के अध्यक्ष प्रतिपाल सिंह उर्फ बंटी ठाकुर ने बताया कि भीषण गर्मी को देखते हुए यह अभियान चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “पानी और दाने की कमी से हर साल सैकड़ों चिड़िया, गौरैया और कबूतर दम तोड़ देते हैं। वे हमसे बोलकर पानी नहीं मांग सकते, इसलिए हमारा फर्ज है कि हम उनकी मदद करें।” बंटी ठाकुर ने शहरवासियों और ग्रामवासियों से अपील की है कि वे अपने घरों की छत, बालकनी या आंगन में एक मिट्टी के बर्तन में साफ पानी और दूसरी कटोरी में बाजरा, चावल या रोटी के टुकड़े अवश्य रखें। “आपका छोटा सा प्रयास किसी बेजुबान की जान बचा सकता है,” उन्होंने कहा।
संस्था द्वारा यह अभियान पूरे एक माह तक चलाया जाएगा और 30 मई को इसका समापन होगा। इस दौरान संस्था के कार्यकर्ता लोगों से संपर्क कर इस अभियान में पूर्ण रूप से सहयोग करने की अपील करेंगे। संस्था का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस मुहिम से जुड़ें और अपनी छतों को पक्षियों के लिए सुरक्षित बनाएं।
महामंत्री शोभित अग्रवाल ने की भागीदारी की अपील
संस्था के महामंत्री शोभित अग्रवाल ने कहा कि भीषण गर्मी को देखते हुए सभी का सहयोग जरूरी है। “हम चाहते हैं कि इस अभियान में शहरवासी बढ़-चढ़कर भागीदारी करें। हर घर की छत पर अगर एक पानी का बर्तन और दाना रख दिया जाए तो सैकड़ों पक्षियों की जान बच जाएगी,” उन्होंने बताया। शोभित अग्रवाल ने सभी से अपील की है कि वे अपने-अपने घरों की छत पर दाना-पानी अवश्य रखें और इस मुहिम का हिस्सा बनें। अभियान के तहत ‘गूंज संस्था’ द्वारा मोहल्ले-मोहल्ले जाकर लोगों को जागरूक करेंगे और सकोरे देंगे। इसके अलावा सार्वजनिक स्थानों जैसे बाजार, बस स्टैंड और पार्कों में भी बड़े बर्तनों में पानी की व्यवस्था की जाएगी, जिसकी देखरेख संस्था के वॉलिंटियर रोज करेंगे। स्कूलों में भी बच्चों को पक्षियों के प्रति दया भाव रखने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार 42-44 डिग्री तापमान में एक छोटी चिड़िया 2-3 घंटे से ज्यादा बिना पानी के जिंदा नहीं रह सकती। गर्मी में तालाब-जोहड़ सूख जाते हैं और पेड़ों पर भी पानी नहीं मिलता। ऐसे में छतों पर रखा पानी ही उनके लिए जीवनदान बनता है। एक गौरैया दिन भर में हजारों ऐसे कीड़े खाती है जो फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए पक्षियों को बचाना पर्यावरण और खेती दोनों के लिए जरूरी है। प्रदेश उपाध्यक्ष मोहिनी वर्मा और आशा सिंह ने कहा संस्था ने अपील की है कि पानी रोज ताजा भरें और बर्तन को छाया में रखें। मिट्टी का बर्तन सबसे अच्छा होता है क्योंकि वह पानी को ठंडा रखता है। दाने में बाजरा, टूटा चावल या गेहूं दे सकते हैं। नमकीन या बासी खाना न डालें। बर्तन को ऐसी जगह रखें जहां बिल्ली या कुत्ते आसानी से न पहुंच पाएं।
अध्यक्ष प्रतिपाल सिंह बंटी ठाकुर ने कहा, “गूंज संस्था का यह प्रयास तभी सफल होगा जब हर नागरिक इसमें साथ देगा। यह किसी एक संस्था का नहीं, पूरे समाज का अभियान है। हम 30 मई तक लगातार लोगों से संपर्क करेंगे।” उन्होंने उम्मीद जताई कि बरेली के लोग इस पुण्य काम में बढ़-चढ़कर सहयोग करेंगे। अभियान के शुभारंभ के अवसर पर संस्था के अध्यक्ष प्रतिपाल सिंह ( बंटी ठाकुर), प्रदेश उपाध्यक्ष आशा सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष मोहिनी वर्मा, प्रदेश महामंत्री शोभित अग्रवाल, रश्मि जोशी, विद्योतमा आजाद, पूजा दुबे, प्रज्ञा सिंह, धर्मेंद्र शर्मा, डॉ विनय कुमार सिंह, योगिता शर्मा, दीक्षा, चित्रा मिश्रा, दीपक आदि मौजूद।









