बिहार कलाँ में शानो-शौकत से मनाया गया जश्ने साबिरे पाक

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बिहार कलाँ में शानो-शौकत से मनाया गया जश्ने साबिरे पाक

फ़िरोज़ खान बरेली। इज्जत नगर के बिहार कलाँ में जश्ने साबिरे पाक बड़ी शानो-शौकत के साथ मनाया गया। इस मौक़े पर उलामा ने ताकीद की कि ईद मीलादुन्नबी का जुलूस ही नहीं बल्कि तमाम जुलूस शरीअत और क़ानून के दायरे में निकाले जाएं। उलामा ने साबिरे पाक की सीरत बयान करते हुए कहा कि हमें उनकी अज़ीम शख़्सियत से सब्र करना सीखना चाहिए।

हाफ़िज़ इमरान रज़ा बरकाती ने कलामे पाक की तिलावत के साथ जश्न की शुरुआत की। मौलाना यूनुस रज़ा, मौलाना नौशाद आलम और मौलाना तारिफ़ बरकाती ने अपनी तक़रीरों में साबिरे पाक की सीरत बयान की। उलामा ने कहा कि अगर हम ख़ुद को साबिरी कहते हैं तो हमें साबिरे पाक की शख़्सियत से सब्र करना सीखना होगा। हमारे जुलूस ऐसे होने चाहिए कि हर देखने वाले को अमन और शांति का पैग़ाम पहुँचे। उलामा ने नमाज़ और रोज़ों की पाबंदी की भी ताकीद की।

जश्न में हाफिज़ अरशद रज़ा, हाफिज़ वसीम रज़ा, हाफिज़ रियाज़उद्दीन सहित कई नातख़्वाँ हज़रात ने नातो-मनक़बत के नज़राने पेश किए। इस मौक़े पर मुहम्मद नईम, मसूद रज़ा, कलीम खां, यासीन मुहम्मद, मुशाहिद बेग, मोहपिस् खां, अक़ील खां, इकरार अली, फिरासत अली, मोनू सिद्दीकी सहित बड़ी तादाद में अक़ीदतमंद शामिल हुए।

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