बरेली। बरेली में हुए बवाल और उसके बाद की पुलिस कार्रवाई को लेकर खानदान-ए-आला हज़रत ने एक संयुक्त प्रेस बयान जारी किया है। बयान में आरोप लगाया गया है कि बरेली के मुसलमानों को बेवजह सामूहिक सजा दी जा रही है और पुलिस झूठे मुकदमे बनाकर बेगुनाहों को जेल भेज रही है।
वहीं संयुक्त बयान में कहा गया कि पुलिस बेगुनाह मुसलमानों पर तमंचा, पेट्रोल बम और तेज़ाब की बोतल से हमले का झूठा आरोप लगाकर गिरफ्तारियां कर रही है। इंदिरा मार्केट के पास वायरल हुए एक वीडियो का हवाला देते हुए बयान में कहा गया कि कुछ अराजक तत्वों ने साजिशन मुसलमानों और पुलिस दोनों पर पथराव किया ताकि माहौल बिगाड़ा जा सके, लेकिन पुलिस इस पर कार्रवाई करने से कतरा रही है।
साथ ही बयान में यह भी कहा गया है कि बरेली शरीफ में लगातार बेगुनाह मुसलमानों को गिरफ्तार किया जा रहा है और थानों में उन्हें बुरी तरह पीटा जा रहा है। यहां तक कि मीडिया के सामने परेड कराई जा रही है जिसमें कई लोग चोटिल और चलने-फिरने तक लायक नहीं रह गए हैं। आरोप है कि थानों में गिरफ्तार लोगों को खाने-पीने तक को नहीं दिया जा रहा है।संयुक्त बयान में कहा गया है कि शहर भर में मुस्लिमों के घरों पर बुलडोजर खड़े कर दिए गए हैं और अवैध तरीके से तोड़फोड़ की जा रही है।
वहीं बयान में यह भी आरोप लगाया गया कि पुलिस ने मस्जिदों में दबिश डालकर इमामों और मुअज्जिनों को प्रताड़ित किया है। इस वजह से कई मस्जिदों में नमाज़ तक नहीं हो पा रही है। खानदान-ए-आला हज़रत का कहना है कि यह मुसलमानों के संवैधानिक अधिकार अपने मज़हब पर अमल करने की आज़ादी का खुला उल्लंघन है। संयुक्त बयान में कहा गया कि पुलिस की ज्यादती से न केवल बरेली बल्कि पूरे मुल्क और दुनिया भर के करोड़ों सुन्नी मुसलमानों में बेचैनी फैल गई है।
खानदान-ए-आला हज़रत की ओर से ये मांगें रखी गईं-
बेगुनाह मुसलमानों की गिरफ्तारी पर तत्काल रोक लगे।पुलिस की दबिश और ज्यादतियों को फौरन बंद किया जाए। झूठे मुकदमे वापस लेकर गिरफ्तार बेगुनाहों को रिहा किया जाए। बुलडोजर कार्रवाई रोकी जाए और दहशत का माहौल खत्म किया जाए।
ठोस फैसला लेने की चेतावनी
संयुक्त बयान में चेतावनी दी गई है कि अगर ये मांगें तुरंत स्वीकार नहीं की गईं तो आने वाले दिनों में ठोस फैसला लिया जाएगा।










